अच्छा चलो प्रयास करेंगे अपने में सीमित रहने का Hindi Poem Achha chalo prayas karenge apne me seemit rahne ka
अच्छा चलो प्रयास करेंगे अच्छा चलो प्रयास करेंगे अपने में सीमित रहने का। धरती भी तो अपनी कीली पर जाने कब से घूम रही है , और न जाने कब से अपने सूर्य देव पर रीझ रही है। अब हम भी अभ्यास करेंगे , अविरल ऐसी गति सहने का , अच्छा चलो प्रयास करेंगे अपने में सीमित रहने का। अम्बर भी अपनी ऊंचाई- पर ही सदा तना रहता है , और वहीं से चाँद- सितारों- का उगना-छुपना रहता है। अब हम भी एहसास करेंगे , नभ जैसे उन्नत रहने का , अच्छा चलो प्रयास करेंगे अपने में सीमित रहने का। सागर भी अपनी गहराई- में ही मिलन गीत गाता है , और इसी गंभीर प्रकृति से शृष्टि-प्रलय भी सह जाता है। हम अद्भुत आभास करेंगे , शोक-सिंधु संचित करने का , अच्छा चलो प्रयास करेंगे अपने में सीमित रहने का। मेरे अभिमानी अग्रज तुम- कैसे निष्ठुर हो जाते हो ? ज्ञान-भक्ति के संवादों से अहंकार में खो जाते हो। आओ बुद्धि- विकास करेंगे , क्रोध-समय संयत रहने का , अच्छा चलो प्रयास करेंगे अपने में सीमित रहने का। शीत लहर सी याद तुम्हारी तन , मन तक सिहरा जाती है , मुस्कानों के महानगर से गम का गाँव कंपा जाती है। पर हम व्रत- उपवास ...