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अच्छा चलो प्रयास करेंगे अपने में सीमित रहने का Hindi Poem Achha chalo prayas karenge apne me seemit rahne ka

अच्छा चलो प्रयास करेंगे  अच्छा चलो प्रयास करेंगे अपने में सीमित रहने का। धरती भी तो अपनी कीली पर जाने कब से घूम रही है , और न जाने कब से अपने सूर्य देव पर रीझ रही है। अब हम भी अभ्यास करेंगे , अविरल ऐसी गति सहने का , अच्छा चलो प्रयास करेंगे अपने में सीमित रहने का। अम्बर भी अपनी ऊंचाई- पर ही सदा तना रहता है , और वहीं से चाँद- सितारों- का उगना-छुपना रहता है। अब हम भी एहसास करेंगे , नभ जैसे उन्नत रहने का , अच्छा चलो प्रयास करेंगे अपने में सीमित रहने का। सागर भी अपनी गहराई- में ही मिलन गीत गाता है , और इसी गंभीर प्रकृति से शृष्टि-प्रलय भी सह जाता है। हम अद्भुत आभास करेंगे , शोक-सिंधु संचित करने का , अच्छा चलो प्रयास करेंगे अपने में सीमित रहने का। मेरे अभिमानी अग्रज तुम- कैसे निष्ठुर हो जाते हो ? ज्ञान-भक्ति के संवादों से अहंकार में खो जाते हो। आओ बुद्धि- विकास करेंगे , क्रोध-समय संयत रहने का , अच्छा चलो प्रयास करेंगे अपने में सीमित रहने का। शीत लहर सी याद तुम्हारी तन , मन तक सिहरा जाती है , मुस्कानों के महानगर से  गम का गाँव कंपा जाती है। पर हम व्रत- उपवास ...

मैं तो था लाचार, प्यार ने तुमको क्यों मजबूर कर दिया main to tha laachaar, pyaar ne tumako kyon majaboor kar diya बलबीर सिंह रंग

 "मैं" तो था लाचार “मैं” तो था लाचार , प्यार ने तुमको क्यों मजबूर कर दिया ? देखा   चारो   ओर   तुम्हारे वरदानों  की  भीड़  खड़ी है , अभिशापित सुहाग की बिंदी विधि  ने  मेरे  भाल  जड़ी है। पाप किया या पुण्य कमाया इसका निर्णय कौन  करेगा , क्योंकि यहाँ की हर परिभाषा लाखों बार  बनी  बिगड़ी है। पाप पुण्य के सिरजन हारो मेरा  दुर्लभ   दान   निहारो , खाली हांथों रहकर जो कुछ जिसे दिया भरपूर कर दिया। “मैं” तो था लाचार , प्यार ने तुमको क्यों मजबूर कर दिया ? दो दिन खेल गँवाया बचपन रातों   में   काटी   तरुणायी , लिखी आंसुओं  ने  जो पाती वह मुसकानों तक पहुंचायी। मैं   दुर्बलताओं    का  बंदी पर   मेरी  हिम्मत  तो देखो , गीतों का परिधान पहन कर सूली  ऊपर  सेज  सजायी। लोक  लाज  के  पहरे दारो आओ  अपनी  भूल सुधारो , इतना ...