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Showing posts from February, 2021

ओ मेरे दुर्भाग्य ! तुम्हारा भृकुटि – विलास सरल कब होगा? O mere Durbhagya , Oh my bad luck

  ओ मेरे दुर्भाग्य ! तुम्हारा भृकुटि – विलास सरल कब होगा ? बचपन गया शिथिल सा यौवन बीत रही जीवन तरुणाई , काले केश – कुसुम कुम्हलाने आकुल अरुणाई अलसाई ,                         प्रौढ़ पींजरे के बंदी का                         कारावास सफल कब होगा ?                         ओ मेरे दुर्भाग्य ! तुम्हारा                         भृकुटि – विलास सरल कब होगा ? सत्कर्मों में रत रह कर भी - हुयी सदा संघर्ष सगाई , सब साधन सम्पन्न सहायक होते हुये पराजय पायी ,             ...

जयशंकर प्रसाद जीवन परिचय

  जयशंकर प्रसाद जन्म -  सन् 1889 ई . निधन - सन् 1936 ई . जन्म स्थान – काशी ( सूँघनी साहू परिवार में ) माता - मुन्नी देवी पिता - बाबू देवी प्रसाद गुरू – ‘ दीनबन्धु ब्रह्मचारी ’ प्राचीन संस्कृत ग्रंथों के अध्ययन के लिए शिक्षक थी। प्रसाद को बचपन में  झारखण्डी नाम से पुकारा जाता था। कलाधार  नाम से ब्रजभाषा में काव्य रचना करते थे। इनके परिवार की गणना वाराणसी के समृद्ध परिवारों में होती थी। प्रसाद का परिवार शिव का उपासक था। जीवन परिचय प्रसाद जी का जन्म माघ शुक्ल 10, संवत् ‌ 1946 वि० ( तदनुसार 30 जनवरी 1889 ई० दिन - गुरुवार ) को काशी के सरायगोवर्धन में हुआ। इनके पितामह बाबू शिवरतन साहू दान देने में प्रसिद्ध थे और एक विशेष प्रकार की सुरती ( तम्बाकू ) बनाने के कारण ' सुँघनी साहु ' के नाम से विख्यात थे। इनके पिता बाबू देवीप्रसाद जी कलाकारों का आदर करने के लिये विख्यात थे। इनका काशी में बड़ा सम्मान था और काशी की जनता काशीनरेश के बाद ' हर हर महादेव ' से बाबू देवीप्रसाद का ही स्वागत करती थी। किशोरावस्था के पूर्व ही माता और बड़े भाई का देहावसान हो जाने के...