ओ मेरे दुर्भाग्य ! तुम्हारा भृकुटि – विलास सरल कब होगा ? बचपन गया शिथिल सा यौवन बीत रही जीवन तरुणाई , काले केश – कुसुम कुम्हलाने आकुल अरुणाई अलसाई , प्रौढ़ पींजरे के बंदी का कारावास सफल कब होगा ? ओ मेरे दुर्भाग्य ! तुम्हारा भृकुटि – विलास सरल कब होगा ? सत्कर्मों में रत रह कर भी - हुयी सदा संघर्ष सगाई , सब साधन सम्पन्न सहायक होते हुये पराजय पायी , ...
हिन्दी कवितायें, रचनाएँ , जीवन परिचय, मुंशीप्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, रामधारी सिंह दिनकर, मैथिलीशरण गुप्त