बीते बर्ष ! बताते जाओ,
मन की बातें जाते - जाते।
बीते वर्ष ! बताते जाओ,
मन की बातें जाते- जाते।
कितने मधुर लगे बचपन में?
क्या सपने देखे यौवन में?
पंख थके तब कैसा अनुभव-
हुआ सिथिलता आते-आते?
बीते वर्ष ! बताते जाओ,
मन की बातें जाते- जाते।
सुमन मुलायम कितने पाये?
तन कितने कल्याण छिपाए?
राव रंक को शांति मिली क्या-
नारायण गुण गाते-गाते?
बीते वर्ष ! बताते जाओ,
मन की बातें जाते- जाते।
जाति-धर्म या वर्ग-भेद की,
“हल्ला-बोल” कुरान - वेद की,
कैसी लगीं ये परिभाषायें-
तुम्हें यहाँ से जाते – जाते?
बीते वर्ष ! बताते जाओ,
मन की बातें जाते- जाते।
तेरह दिन की अटल कहानी,
देव-इंद्र की संयुक्त वानी,
सीता राम रिझा पायी क्या-
माया काशी जाते – जाते?
बीते वर्ष ! बताते जाओ,
मन की बातें जाते- जाते।
कितना सुख भोगा जीवन में?
है कैसी चिंता चितवन में?
कितने अपने निकट रहे, और-
कितने खोये पाते – पाते?
बीते वर्ष ! बताते जाओ,
मन की बातें जाते- जाते।
आया कौन बिना आमंत्रण?
किसने ठुकरा दिया निमंत्रण?
कौन समय पर मुकर गया है-
झूठी कसमें खाते – खाते?
बीते वर्ष ! बताते जाओ,
मन की बातें जाते- जाते।
रो – रो रात सुलाने वाले,
गा – गा प्रात जगाने वाले,
कहो किसी के हो पाये क्या-
भाव – जगत को भाते – भाते?
बीते वर्ष ! बताते जाओ,
मन की बातें जाते- जाते।
तन तो माटी की महिमा है,
मन परमेश्वर की गरिमा है,
क्या तन को भी ललचाये हैं-
मन – दर्पण पर छाते – छाते?
बीते वर्ष ! बताते जाओ,
मन की बातें जाते- जाते।
अच्छा बिदा विलम्ब हो गया,
मेरा भी आलम्ब खो गया,
नींद सुहानी रूठ गयी है-
स्वप्न – सँदेसा लाते – लाते।

Bahut badhiya
ReplyDeleteManmohak kavitaye 🙏🙏👌🏼👌🏼
ReplyDeleteNice mama ji 🙏
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