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बहुत रो चुके अब मत रोओ।

          बहुत रो चुके अब मत रोओ।

                               बहुत रो चुके अब मत रोओ।

                               रोने से आँसू बहते हैं,
                               मन के दुख जग से कहते हैं
,
                               जग सुन ले
,
                               सुन कर इठलाये
,
                               हँसे, और चाहे, फिर रोओ।

                               बहुत रो चुके अब मत रोओ।

                               जितना जग न जमा कर पाया,
                               उतना तुमने व्यर्थ लुटाया
,
                               फिर भी तुम्हें
-
                               कृपण समझे
,
                               ऐसे जग पर मत नयन भिगोओ।

                               बहुत रो चुके अब मत रोओ।।

                               मुझको ही देखो मैं क्या हूँ?
                               महा सृष्टि में लघु तृण सा हूँ
,
                               फिर  भी जग-
                               जलता है
, तुम तो-
                               रूप धनी मोती मत खोओ।

                               बहुत रो चुके अब मत रोओ।।

                               तुमने भी जग से क्या पाया?
                               सुख की छाया
, दुख की माया,
                               देखो इस
-
                               छाया-माया को
,
                               फिर मत मिथ्या स्वप्न सँजोओ।

                               बहुत रो चुके अब मत रोओ।।

                               कल ही देखो क्या कुयोग था?
                               संध्या-दिवस मिलन सुयोग था
,
                               इस आकस्मिक
,
                               मधुर मिलन पर
,
                               भ्रमितों से भयभीत न होओ।

                               बहुत रो चुके अब मत रोओ।।

                               भ्रम को क्या कुछ भी कह देगा,
                               तो कवि भी हँस कर सह लेगा। 
                               तुम सोचो,
                               समझो, फिर कवि के- 
                               गीतों में संगीत पिरोओ।

                               बहुत रो चुके अब मत रोओ।।
                               
                               रोने से आँसू बहते हैं…………….


                               रामवीर सिंह चौहान
                                  (01-12-1994)

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