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किसी अजाने गाँव में आओ हम तुम हो आयें हिन्दी कविता Hindi poems

आओ हम तुम हो आयें 

दूर नगर के कोलाहल से 
किसी  अजाने  गाँव  में 
सुख सपनों की छांव में
आओ हम तुम हो आयें। 
                             जहां सदा उन्मुक्त विहग दल
                             भोर  उगाता  है  गा - गा कर
                             कली- कली  के द्वारे  मधुकर
                             प्यार  जताता  है  जा-जा कर।
जहां तरुणियों की पायल से
आबाद रहा करते पनघट
जहां की राधा की मोहन से
हो जाया करती थी खटपट।
                             जहां कि हर स्थल है देवस्थल
                             जहां कि शंकर है हर पीपल
                             जहां कि हर मन है गंगाजल
                             वहाँ    मलिन मन धो  आयें।
जहां के तरुवर कि डाली से,
मधुर कोकिला तान सुनाती
हांथ हिलाती सी हरियाली
रहती सबको पास बुलाती।
                             जहां परस्पर मनुज सहोदर
                             जहां प्रकृति का रूप मनोहर
                             जहां निखिल जीवन है सुंदर
                             वहीं    कहीं   हम  खो जाएँ।
जहां न बीता करते हैं   दिन
यों ही व्यर्थ     बहानों    में
जहां कि मानव रहता व्यस्त
खेतों  या        खलियानों में।
                             जहां कि श्रम के हांथ न रुकते
                             आँधी    बरखा    तूफानों     में
                             संकल्पों   के   पाँव   डिगते
दुर्गम   गिरिवन   वीरानों    में।
जहां कि जीवन है इक निर्झर
वहता रहता अथक   निरंतर
जहां प्रगति है गति पर निर्भर
जड़ता    वहाँ    डुबो   आयें।
                             दूर नगर के कोलाहल से 
                             किसी  अजाने  गाँव  में 
                             सुख सपनों की छांव में
                             आओ हम तुम हो आयें। 

                             


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